ऐ इत्मीनान पाने वाली जान
-
मौत जब भी आए, तो अपनों के बीच चहारदीवारी में आए. और रूह क़ब्ज़ करने वाला
फ़रिश्ता ये पैग़ाम लेकर आए-
ऐ इत्मीनान पाने वाली जान !
तू अपने परवरदिगार की तरफ़ इस ...
3 days ago




1 Comments:
आपकी उर्दू मे मुझे अपनी ओर खींच लाया. अल्फाजों की बाजीगरी का जवाब नहीं.
Post a Comment