Tuesday, September 23, 2008

ग़ज़ल

4 Comments:

मौसम said...

सुब्हान अल्लाह...बेहतरीन ग़ज़ल है...

तसलीम अहमद said...

kya gazal kahi hai apne.

ऊर्दू दुनिया said...

बहुत खूब.
बहुत ही उम्दा ग़ज़ल.
दीमक ने चुपके-चुपके वो एलबम ही चाट ली,
महफूज़ जिंदगी का कोई पल नहीं रहा.

ये शेर तो तारीफ के अंदाज़ से बहार है.

ऊर्दू दुनिया said...

ek guzarish hai aapse
computer me urdu likhne ke liye koi asaan tarika ho to zarur bataye
meri Email id
sumit.yaas@gmail.com

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